तेरे नाम लिखता हूं
तेरे नाम लिखता हूं
जज़्बातों की स्याही से दास्तां ए ज़िंदगी ए शाम लिखता हूं
चल मैं आज रात ए ग़ज़ल ए मुहब्बत तेरे नाम लिखता हूं
पागल है दिल मेरा मदहोश रहता है तेरे इश्क़ में हरदम की
दिल की यमुना किनारे तुझे राधा ख़ुद को श्याम लिखता हूं
यूं तो मैं कभी शराब नहीं पीता पर रहता है मुझे नशा तेरा
की ख़ुद को मैखाना और तुम्हें मुहब्बत ए जाम लिखता हूं
तेरी हर सितम हर गुस्ताखी सह लूं पर तेरा दामन बेदाग़ रहे
इसलिए तुझे बेकसूर और मेरे नाम सारे इलज़ाम लिखता हूं
तुम जियो हसीन इक ज़िंदगी हर पल खुशी खुशी जहां में
इस खातिर तेरे हिस्से मैं अपनी खुशियां तमाम लिखता हूं।

