STORYMIRROR

Komal Kamble

Tragedy Action Inspirational

4  

Komal Kamble

Tragedy Action Inspirational

तेजाब

तेजाब

1 min
220

ना माना कहना उसका

तो उसने चेहरे पर तेजाब फेंक दिया

इस गुुनाह की पनाह लेेकर उसने

मेेरे सपनों और खुशियों को बदसूरत कर दिया


कहता था मुझसे प्यार करो

वरना तुम्हें कर दुंगा मैं बर्बाद 

क्या कहूं उसकी सोच को

इसे अगर प्यार कहते है


मैं दुआ करती हूं ईश्वर से

ऐसा कभी किसी के साथ होने ना देना

जिस तरह टूटे है मेरे सपने

किसी और के ख्वाबों को टूटने ना देना


इस वाकियेने

मेरे हौसलों को ही तोड़ दिया

दर्पण में देखा जब चेहरा अपना

तब लगा कि मेरा वजूद ही मिट गया


एक वक्त ऐसा लगा कि

खुद की सांसें रोक दूं

मेरी पहचान ही अगर मिट गई है

तो फिर मैं क्यों जिऊं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy