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Lakshman Jha

Tragedy

2  

Lakshman Jha

Tragedy

"तड़प "

"तड़प "

1 min
57



याद हमें करने से भला क्या ? 

दिल तड़पने से भला क्या ?

दूर जा के बस गए हो तुम ! 

अपनों को भूल गए हो तुम !!

बूढ़ी माँ को थोड़ा याद करो ! 

अपनी मिट्टी से प्यार करो !!

तुम्हें बुलाती है अपनी धरती ! 

बांहें पसारे ये सब दिन रहती !!

विदेशों में तुम्हें प्रवासी कहेंगे ! 

वक्त पड़ने पर मुंह मोड लेंगे !!

तुम जो अपनों से बिछड़ जाओगे! 

अपने बच्चों से यही तुम पाओगे !! 


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