STORYMIRROR

Syeda Noorjahan

Drama Classics Inspirational

4  

Syeda Noorjahan

Drama Classics Inspirational

सवेरा

सवेरा

1 min
236

क्यों दिलों में नहुसत का डेरा है

हर तरफ रौशनी फिर भी अंधेरा है


अभी तो आग़ाज़े शब है तुम अभी से थक गए

होश संभाले रखना अभी दुर सवेरा है


परेशान क्यों होते हो अगर हम उदास हैं

ज़िन्दगी की छत तले ग़मों का बसेरा है


चलो दे दो तुम हमें अपने ग़म तोहफे में

क्या करें ज़िन्दगी का हर ख्वाब तेरा है


क्यों दौलत के लिए होते हैं खुवार सब

जानते हैं यह रुपया ना तेरा ना मेरा है


हैरान क्यों है ज़माना मुझे देख कर

मैंने कामयाबी को अपनी ओर घेरा है


खाक में मिल जाएं हर कोशिश उसकी

जो छीनना चाहे वह कुछ जो तेरा है


रहे खुशहाल हर शख्स मेरे घर का

रौशन दुआ का अलग अंदाज तेरा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama