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Shailaja Bhattad

Abstract

5.0  

Shailaja Bhattad

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स्वच्छंद विचार

स्वच्छंद विचार

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जिम्मेदारियों के कद रोज बढ़ते ही रहे।

अरमानों के बवंडर उठते ही रहे ।

तूफानों से आकर झकझोरते रहे।

पर मुस्कान को कभी फीका न कर सके।

मेरी मंजिल के सफर को कभी मोड़ न सके।


हौसले ही है जो सपनों से रूबरू कराते हैं ।

तकदीर को तस्वीर बना देते हैं।

उम्मीद को हकीकत में बदल देते हैं।

नामुमकिन को शब्दकोश से हटा देते हैं।






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