STORYMIRROR

chandraprabha kumar

Fantasy

4.0  

chandraprabha kumar

Fantasy

सुषमा बेजोड़

सुषमा बेजोड़

1 min
22

     

फूलों से लदे पेड़

पीले नारंगी लाल गुलाबी,

जहां निगाह जाये

वहीं अटक जाये।


सुषमा इतनी लुभाये

मन न भरे,

 अपने को भूल जायें

देखते ही रह जायें ॥


यह प्रकृति का संग

कभी कभी ही मिलता,

पर जब भी मिलता

सौमाग्य से मिलता।


अपने से बाहर निकलें

अन्तर्मन में जाने के लिए,

लगता विरोधाभास 

पर यही सच भी है।


अन्दर बाहर का भेद 

मिटकर हो अभेद,

सब कुछ हो एकाकार

माया मायापति एक राग ॥



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy