STORYMIRROR

karan ahirwar

Abstract Classics Fantasy

4  

karan ahirwar

Abstract Classics Fantasy

मेरी आस मेरे पास

मेरी आस मेरे पास

1 min
207

मेरी आस, मेरे पास

मेरे खास, मेरे पास

बैरियों को यहां नहीं है घास


मेरे अंजर, मेरे खंजर

सब है अंदर

बनके समंदर

आएगी सुनामी


तेरे यादें, बो बादें

जो रह गए सादे

होके जुदा क्यों ना बांधे

ये बाल क्यों


तेरे मन का, मेरे तन का

टुकड़ा हर जान का

टूटा ऐसे क्यों


तू नहीं पास मेरे

मुझको ऐसी सजा क्यों


एक प्यार को साधे है

दूजा में से भी आधे आधे है

प्यारा बंधन जुड़ा रहे

बस यही दुआ मांगे है


तेरी खुशियां को रखना 

तेरे पास

मेरी ख्वाहिशें सारी ही है

मेरे पास


मेरी आस, मेरे पास

मेरे खास, मेरे पास


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract