STORYMIRROR

Vijay kumar Mishra

Fantasy

4  

Vijay kumar Mishra

Fantasy

उदासियों के तल्ख़ बीत जानें दो

उदासियों के तल्ख़ बीत जानें दो

1 min
287

जिंदगी उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो

जो खुश है उन्ही को नया गीत गाने दो

हम खामोश हो गए इस शहर में

चलो झूठ ही सही उसे अब जीत जाने दो

 उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो !


किसी से न कोई कभी हमारा खफा था

 हर किसी के लिए दिल से वफ़ा था

 झूठे लोगों का ही सही उनका प्रीत आने दो

 बेवफाई का एक नया रीति आने दो

 उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो !


चालाको से अच्छे तो बेजुबान अच्छे थे

महलों से बढ़िया गरीबो के मकान अच्छे थे

गर्मी के आने के बाद शीत आने दो

हार ही सही हार वाली जीत आने दो

उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy