Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Savita Gupta

Abstract

4  

Savita Gupta

Abstract

सुन लो...

सुन लो...

1 min
228


न पूजी जाने की तमन्ना

न सहानुभूति की कामना

न चाह शक्ति रुपा बनना

न ही कमजोर है नारी सुनना

सीता न ही सावित्री बनना


इंसान है बस नारी ललना

समानता सम्मान का हो गहना

कर सकती है हर चुनौती का सामना


चुप न रहुँगी न सहुँगी प्रताड़ना

पश्चिम की अनुसरण की न हो भावना

भारतीयता की परछाई संग आगे बढ़ना 


तोड़ कर सदियों की विडंबना 

उतार कर पाँवों की बेड़ियाँ 

बस प्रगति पथ पर चलना

यही है नारी की कामना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract