सुकून
सुकून
जब याद तुम्हारी मुझे सताती है,
तुम्हें मिलने के लिये बेताब बनते है,
तुम्हारे ही खयालों का ये कारवां,
रात भर मेरे मन में चलता रहता है।
जब रास्ते में तुम दिखाई देती है,
मेरे दिल में कुछ कुछ होने लगता है,
मुझे देखकर तुम्हारा मुंह मोड़ लेना,
मेरे दिल के हजार टुकड़े करते है।
जब रात को तुम ख्वाबों में आती है,
मेरी रातें तेरे इंतजार में बीतती है,
मुझ को रोज़ रात भर ऐसे तड़पाना,
मेरे मन को गहरा सदमा पहुंचता है।
जब मिलन की प्यास बढ़ जाती है,
हम सितारों की महफिल जमाते है,
चांद में तेरा खूबसूरत चेहरा देखकर,
"मुरली " को हमेशा सुकून मिलता है।

