Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Mr. Akabar Pinjari

Drama


4.9  

Mr. Akabar Pinjari

Drama


सुहानी वर्षा

सुहानी वर्षा

1 min 747 1 min 747

काले-काले मेघा से फिसलती है बारिश,

ऑधी तूफ़ानों से टकराते चलतीं है बारिश,

कभी पहाड़ों से गलकर,

कभी नदियों से ढलकर,

कभी झरनों से चलकर,

कभी समंदर से मिलकर,

गुनगुन गीत गाती चलती है बारिश।


बिजलियों की चंचलता में,

बादलों की शितलता में,

आफताब की लालिमा में,

चंद्रमा की कालिमा में,

इंद्रधनुष के रंगों में लिपटी आती है बारिश।


कभी मकानों के छत पर,

कभी तालाबों के मट पर,

कभी झीलों के तट पर,

कभी कुओं के बट पर,

टिप-टिप-२ छम-छम करती

उनके अंगों पर नाचती है बारिश।


कभी चेहरे का रूबाब बनकर,

कभी हुस्न का शबाब बनकर,

कभी सीप का मोती बनकर,

कभी नदी की धारा बनकर,

फिसलती, टकराती, चमकती, दन्नाती बारिश।


रिमझिम-रिमझिम बारिश की फुहारें,

मन आंगन को है भाती बौछारें,

रंग-बिरंगे छाते लेकर बच्चे करें गुहारें,

बरखा की बूंदों का स्वागत करें बांहे पसारें,

वसुंधरा को नव श्रृंगार से साज़-सजाती बारिश ।


कभी पेड़ों के पत्तों पर मोती बनकर,

कभी किसानों के मन की ज्योति बनकर,

कभी नेताओं की रोटी बनकर,

कभी बाज़ारों की पनौती बनकर,

हर दिल का हाल सुनाती बारिश।


आओ मिलकर सभी विचार करें,

बारिश का आभार करें,

आओ पेड़ लगाएं हम,

बारिश को बढ़ाएं हम,

सब मिलकर यह संकल्प खाएं,

बारिश को यूं ही न गवाएं,

क्योंकि धरती से अंबर तक खुशहाली लाती बारिश।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Mr. Akabar Pinjari

Similar hindi poem from Drama