Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Mr. Akabar Pinjari

Tragedy


4.4  

Mr. Akabar Pinjari

Tragedy


ऐसा ख़ुमार कहां देखा है

ऐसा ख़ुमार कहां देखा है

1 min 447 1 min 447

मेरी मुस्कुराती हुई आंखों के पीछे का झलकता समुंदर कहां देखा है,

उस दर्द के पुजारी ने मेरा ईमान कहां देखा है,

चलता रहा हूं मैं राह पर, बेपरवाह परवाने की तरह,

उसने आशिक-ए-मंजिल इशारा कहां देखा।


खौफ़ तो बहुत था, अपनी राह को चुनने में,

इत्तला भी ना किया कभी, हमने दर्द को चुनने में,

एक अलग ही मजा है जो भी है उसमें गुजारा करने में,

मासूम इस दिल के गुलशन ने, महकता गुलाब कहां देखा है।


चारमीनार पर चढ़ जाऊं,

या इंद्रधनुष से लड़ जाऊं,

पंखों में भरकर उड़ान, उड़ तो लूंगा ही,

पर इस दिल के शहजादे ने, नया आसमान कहां देखा है।


शरीक हो पाए हम, तेरी खुशियों में गर कभी,

भूल कर सारे ग़म, आ गले लग जाए हम कभी,

इतराती अदाओं से, टकराती रही है फिजाएं भी हमेशा,

इस हमनशी वीरान पहाड़ियों ने, बहकता तूफ़ान कहां देखा है।


आओ ऐतबार कर लो अब हम पर,

आओ एक वफ़ा-ए-वार कर लो हम पर,

भूल चुके है हम भी अपनी ही काबिलियत,

इस रंगीले नटखट आशिक का, तुमने ख़ुमार कहां देखा है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Mr. Akabar Pinjari

Similar hindi poem from Tragedy