Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Bhavna Thaker

Classics


4  

Bhavna Thaker

Classics


सुबह होने तक

सुबह होने तक

1 min 194 1 min 194

एक रात दे दो मुझे 

सुबह होने तक पूरी उम्र गुज़ार लूँ

तुम्हारे कंधे को तकिया बनाकर सोऊँ 

तुम्हारे कानों में गुनगुनाते 

मखमली आवाज़ का जादू घोले

इश्क की गाथा कहनी है सुबह होने तक ...


मेरे अहसास की जुबाँ समझो 

मेरी चुड़ीयों की खनकार पी लो

तुम्हारी धडक से ताल मिलाते कहती है

ए सुनों न 

नखशिख इस सुनहरे तन का शृंगार करो न सुबह होने तक...


छूना नहीं है तुम्हें पहनना है ऐसे जैसे रूह के उपर तन का चोला 

मेरी त्वचा पर परत बनकर छा जाओ न सुबह होने तक...

 

खुली ज़ुल्फ़ो की फिरदौसी खुशबू में खो जाओ न खुले

आसमान के शामियाने तले एक दूसरे को महसूस करें सुबह होने तक...


मेरी पायल के अरमाँ पूरे कर दो झनकार के शोर पर अपना दिल बिछा दो 

सन्नाटे के साये तले मुझको मुझसे चुरा लो सुबह होने तक...


फ़िकी ज़िस्त में मोहब्बत की मेहंदी रच दो न

एक रात की दुल्हन बनाकर इस अब्र

से तन को पाक कर दो न सुबह होने तक...

  

होंठों में दबी उफ्फ़ निकल जाए 

एक मोहर की आस में अटकी है 

हया के दायरे से कदम लाँघकर मैं तुमको तुमसे मांगती हूँ 

खुद को मेरी अमानत समझकर सौंप दो न सुबह होने तक...


Rate this content
Log in

More hindi poem from Bhavna Thaker

Similar hindi poem from Classics