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Gagandeep Singh Bharara

Abstract Tragedy Inspirational

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Gagandeep Singh Bharara

Abstract Tragedy Inspirational

सतयुग के कलंक

सतयुग के कलंक

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चोरी, चाकरी और मकारी,

थे कभी, सतयुग के जो कलंक,


हैं, यह आज का सच्,

और जीवन का सारांश,


हो चाहे काम - काज,

या रिश्तों की पहचान,


इस के बिना कोई यश नही,

ना कोई असल मकाम,


मनुखता का हर अहसास।।

इसी सोच से गृहस्थ है,


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