सपने देखना छोड़ दिया मैंने
सपने देखना छोड़ दिया मैंने
उड़ने का सपना क्या देख लिया
लगता है बड़ा गुनाह हो गया
किमती सपने तोड़ कर मेरे
लोगों का उत्साह दोगुना हो गया
वो लोग पूछते है आखिर मुझे
अब गम किस बात का है
मैं तो खुद ढूंढ रही हूं कि उन
लोगों को अहम किस बात का है
मेरा सपना तोड़ कर लोग
मुझे मेरी ही औकात दिखाते हैं
जो सपने आंखों में सजते थे
वो सपने आंसू बनकर बह जाते हैं
मैं भी सोचती हूं आज कल
छोड़ो अब लड़ने में क्या होगा
जो सपना कभी मेरी आंखों में था
अब और ने पैरों से कुचला होगा
जमीन पर बैठे-बैठे अब
ऊपर देखना छोड़ दिया है मैंने
बहुत बड़े-बड़े सपने थे पर
उन सपनों को तोड़ दिया है मैंने।
