STORYMIRROR

Kavita Agarwal

Tragedy

3  

Kavita Agarwal

Tragedy

संवेदना

संवेदना

1 min
187

वतन का नाम लेते ही गर्व होता हैं 

सीना तान अपना एक अलग गुरुर होता हैं

पर जब खबर पड़ती हूं अखबार में

बेचैनी हो जाती है बुखार में


दो साधुओं को मार गिराया

हिंदू मुसलमान अलग है यह जताया

देश हमारा एक है

एकता का प्रतीक है


फिर कहां से आई इतनी नफरत

सोचा ना लठ चलाते समय एक कफरत

समय बहुत भारी है

साथ होना जरूरी है


हिंदू मुस्लिम भाई भाई

सबका मालिक एक है कहते हैं साईं

भाई मेरे प्रेम बाँटो

जियो और जीने दो रास्ता ना काटो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy