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Vijay Kumar parashar "साखी"

Classics

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Classics

सँघर्ष करना पड़ेगा

सँघर्ष करना पड़ेगा

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खिलना है फूल को तो सँघर्ष करना पड़ेगा

उड़ना है आसमान में तो गिरना भी पड़ेगा

बीज ज़मीन का सीना ऐसे ही न चीर देता है,

वृक्ष बनने को कई वर्षों तक तड़पना पड़ेगा

सफ़लता कोई एकदिन में नही मिल जाती है,

मंजिल कोई एक क़दम से नही मिल जाती है,

कोहिनूर बनने के लिये पत्थर से लड़ना पड़ेगा

झरना बनने को पत्थरो पे निशां करना पड़ेगा

गर आप एवरेस्ट तक की सफलता चाहते हो,

तो आपको सर चाँद-फ़लक तक करना पड़ेगा

जीतनी बड़ी कामयाबी,उतनी बड़ी दुःख-घाटी,

शबनम बनने के लिये शोलों पे चलना पड़ेगा

खिलना है फूल को तो सँघर्ष करना पड़ेगा

सूरज की भांति गर चमकने की तेरी ख्वाइश है,

सूरज के जैसे तुझे जिस्म जलाना तो पड़ेगा

लक्ष्य पे तीर चलाना है तो पार्थ बनना पड़ेगा।



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