STORYMIRROR

sarika k Aiwale

Romance Classics Inspirational

4  

sarika k Aiwale

Romance Classics Inspirational

सवाल या शिकवा

सवाल या शिकवा

1 min
427

हर बात पे सवाल है निगाह मै

हर साथ पे क्यो शिकवा है

ना करु बया तो भी गिला करे

बया करु तो क्या यकिन करोगे


जिंदगी अभी तो मिली साँसो से

साँसो मै खुशिया क्यो गिनते हो

दबी सिस्किया मै पल जिते हो

पलकों की इन्ही आह मै भी


वही तबाही क्यो सोचते हो

हर बात पे सवाल है निगाह मै

हर साथ पे क्यो शिकवा है

चंद पल ही सही गैर हो गये

बस आहाटो में सदीया जी लिये


चाली अगर जुबान कही तो

वदियों मे दफन वो सिले हुये

किस बात पे मिली हो मोहलते

किस जन्म की सोच लिये दुवाये


जिने का यही एहसास लिये

निगाहे दिलपर देती दस्तक है

हर बात पे सवाल है निगाह मै

हर साथ पे क्यो शिकवा है


आज भुलकेभी वही राह चल दिये

जहासे वो जिंदगी को ही छोड चले

हर बात पे सवाल लिये निगाह मै

हर सवाल का भी हल ढुंढ लेते है


पल हर पल का हिसाब है रखते

जिंदगी फिर भी करती एहसान है

बहके वपिस वही मोड पे लाती है

जहा से बिखरने की वजह बसी है

वही से जुडणे की सजा सुनाती हैं..


हर बात पे सवाल है निगाह मैं

हर साथ पे क्यों शिकवा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance