झूठे-रिश्ते-नाते
झूठे-रिश्ते-नाते
झूठे है, दुनिया मे तो सब ही रिश्ते-नाते
वक्त आने पर कोई भी काम नहीं आते
जिनको हम अपना मानकर बड़े इतराते
वही मुसीबत में छोड़कर, हमें भाग जाते
एकदिन वो लोग पीठ में छुरा घोंप जाते
जिन्हें हम अपना कहकर, फूले न समाते
किसे अपना कहे, भोर भी बनी अब रातें
झूठे है, दुनिया मे तो सब ही रिश्तेनाते
झूठे है, रिश्तेदारों, मित्रों के कसम-वादें
मुफलिसी में साये भी साथ छोड़ जाते
जहां कभी हम महफिलों को है, सजातें
आज बुरे वक्त में, महफिलों में हुए, सन्नाटे
बुरे वक्त में सबसे पहले वह छोड़ जाते
जिनसे स्वार्थ से ही हमारे, सब रिश्तेनाते
बुरे रिश्तों से सबक ले, असलियत बताते
बुरा वक्त याद रख, जीवन जीना सिखाते
ओर छोड़ दे, व्यर्थ के सारे छद्म रिश्तेनाते
उन्हें याद रख, जो गरीबी में साथ निभाते
जो समय रहते, सही समय पर जाग जाते
वही दुनियादारी तूफानों में हंसते-मुस्कुराते।
