STORYMIRROR

Aditi Vats

Abstract Classics Inspirational

4  

Aditi Vats

Abstract Classics Inspirational

दिल्ली शहर

दिल्ली शहर

1 min
402

दिल्ली शहर का क्या हाल मचा है 

देखो तो क्या हाहाकार मचा है 

दुनिया जहां के हॉस्पिटल है यहां 

अनगिनत मौत हो रही है जहां ।


रोजाना खबर अपनो को खोने की आ रही 

ऐसा लग रहा मानो दुनिया खत्म होती जा रही 

अखबार का हर एक कोना 

हर बार यूंही कहता , किसी अपने को मत खोना।


दिल्ली शहर दिल का शहर था रहा 

देखो आज कितना लाचार ओर बेबस हो रहा 

मोल की सासों का मोल हो रहा 

पूरा शहर सासों को मोहताज हो रहा ।


सुबह से शाम तक, दिन से रात तक  

आंकडे दर्ज हो रहे 

रोज रोज सबके अपने खो रहे 

देखो ! दिल्ली शहर का क्या हो रहा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract