STORYMIRROR

Sonam Kewat

Tragedy Classics Inspirational

4  

Sonam Kewat

Tragedy Classics Inspirational

संघर्ष जारी हैं

संघर्ष जारी हैं

1 min
583

कमाने के वक्त यह डिग्रियां 

कभी काम नहीं आती हैं 

मैं बहुत कुछ करना चाहतीं थीं 

पर तकदीर कहीं और ले जाती है 


अब लगता है कि जिंदगी की 

दौड़ में मैं कहीं पीछे छूट चुकी हूं 

कभी खुद से प्यार था पर 

अब तो खुद से भी रूठ चुकी हूं 


समझ नहीं आता जिम्मेदारियां तो है 

शायद मैं उनके लायक नहीं बन पाती हूं 

लोग तो अब भी भीड़ में गुम है 

फिर क्यों मैं खुद को अकेला पाती हूं 


मैं तो कुछ कर ही नहीं पाई 

अब यही अफसोस होता है 

घर में एक कोना है बस वही 

बैठे-बैठे यह दिल खूब रोता है 


आखिर कहीं तो हो जहां मैं खुद को 

जिम्मेदारियों तले साबित कर पाऊं 

कोई तो वक्त बदल जाए मेरा

जब अपना नाम मैं गर्व से बताऊं 


पैसा कमाना है नाम कमाना है 

और बहुत कुछ है कमाने के लिए 

जब लोग पूछते हैं करती क्या हो 

कुछ होता ही नहीं बताने के लिए 


सच है कि तकदीर जितना देती है 

उससे ज्यादा ही अपने आप लेती है

समझों कि जिंदगी का संघर्ष जारी है 

देखो कब ये तकदीर साथ देती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy