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Vinod Kumar Mishra

Romance

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Vinod Kumar Mishra

Romance

समुंदर

समुंदर

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सुंदर साज सजाकर सँवरे

अनादि - अनंत तक जो फहरे

लाखों राज छुपाकर लहरें

तेरा हो या मेरा दिल हो।


सुख - दुःख की अनुभूति कराता

अपने व बेगाने बनाता

गहरा समुंदर सा यह होता

तेरा हो या मेरा दिल हो।


जब यह हँसता रूप सलोना

महक उठे जगती का कोना

रोये तो मासूम अलोना

तेरा हो या मेरा दिल हो।


'वीनू' झूमे अँगने अपने

जिस पर निर्भर सारे सपने

जीवन के अनमोल हैं गहने

तेरा हो या मेरा दिल हो।


दिल से दिल का नाता जोड़े

जन से जन का नाता तोड़े

रूठ के धरती से मुख मोड़े

तेरा हो या मेरा दिल हो।


सार यही संसार यही है

जीवन का उपहार यही है

हर्ष विषाद का यह संगम है

तेरा हो या मेरा दिल हो।


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