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Rashi Saxena

Children

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Rashi Saxena

Children

स्मृति नैया

स्मृति नैया

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ले चल मल्लाह आज उस पार

मिल जाए जहाँ बचपन की मस्ती

पिता की हस्ती माँ का प्यार

मिल बैठ खेले पत्ते हम दोस्त चार 

डांटे टीचर खाये मास्टर जी की मार


भविष्य की चिंता न ही घर बार

कोई जिम्मेदारी न नौकरी व्यापार

सुबह स्कूल शाम खेल

रात दादी की कहानियां 

उसपे हमारे सवाल हज़ार


बहिन को कसना ताने तंग 

भाई से लेना पॉकेट मनी उधार

बिन सोचे कह देना 

स्पष्ट अपने विचार 

न रहने का सलीका था तब


न ढंग का था आचार 

घर मोहल्ले का रहता था 

हमारे पास हर समाचार 

ले चल मल्लाह आज उस पार

मिल जाए जहाँ बचपन की मस्ती।


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