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chandraprabha kumar

Romance

4  

chandraprabha kumar

Romance

स्मरण तेरा

स्मरण तेरा

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9

    

   मेरे नीरव मन की पीड़ा को

   क्या कोई जानेगा,

    इन नीरव बरसात की रातों में 

    मैं अपनी अँखियन में नींद लिये ,

     तेरे स्मरण में जगकर रात बिताती हूँ

     क्या कोई मेरी इस पीड़ा को पहचानेगा ? 


   कितनी बार प्रभु से विनती करती हूँ 

   अपना सूना संसार सरस करने को,

   पर फिर स्वप्न टूट जाता है 

    और मैं तेरी याद छुपाए ,

    वास्तविक जगत में आती हूँ 

     तेरी ही स्मृति मन में संजोये।


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