सलाम है सैनिक तुझे मेरा
सलाम है सैनिक तुझे मेरा
सरहद पर बैठा सैनिक,
सोचती हूँ,
क्या सोचता होगा !
बारूदी बिस्तर
खूनी खंजर
निंदिया क्या नयनों को लुभाती होगी
गोली की गरजना में
रूह क्या सुकून पाती होगी !
क्यों जाता है कोई सरहद पर
सोचता ना होगा
माँ बाप के जज़्बात को
क्या ले पायेगा वापिस उस प्यार को !
ख्यालों में भिगे मन को
ध्वनि ने आ खामोश कर दिया
"भारत माता की जय"
"वन्दे मातरम"
इन आवाजों ने आ सराबोर कर दिया
ऐ सैनिक तुझे मेरा सलाम
वो ख्याल, वो खौफ़
सब टूट गये
घर दीवार नहीं, हिंदुस्तान है अपना
उठ गयी बैठी थी जहाँ
हाथ लिये माथे को छू
मुख से निकली ज़ुबान की रूह !
सलाम है सैनिक तुझे मेरा
कर्म को, तेरे धर्म को
तेरा जज़्बा तेरी रूह को
सलाम है सैनिक तुझे मेरा सलाम है।।
