सीली_हवा
सीली_हवा
सीली-सीली हवा ने जब
दामन मेरा छुआ
यूँ लगा जैसे मुझे
याद तूने किया !
महक उठे सारे नज़ारे,
मौसम ने किये इशारे
आ लौट आ दिलरुबा !
सीली-सीली हवा ने जब
दामन मेरा छुआ।
यूँ लगा जैसे मुझे याद तूने किया !
रात चाँद आस्माँ पर खिला
चाँदनी ने मेरे चेहरे को छुआ
मखमली लबों की छुअन से तेरे
तन-मन कस्तूरी सा महकने लगा !
सीली-सीली हवा ने जब
दामन मेरा छुआ...
यूँ लगा जैसे मुझे याद तूने किया !
बहकी-बहकी रुत
बहके हैं सारे नज़ारे..
खो जायें इक दूजे में हम
मौसम ने भी किये हैं इशारे
आ लौट आ दिलरुबा !
सीली-सीली हवा ने।

