STORYMIRROR

Radha Shrotriya

Fantasy

3  

Radha Shrotriya

Fantasy

वो बारिश की बूँदें

वो बारिश की बूँदें

1 min
14

अजीब सी रात थी गहरी ख़ामोशी को चीरती बारिश की बूँदें …

छाता मेरे हाथ में होने के बावजूद भी पानी में तर बतर हो चुकी थी मैं

आकाश में छायी गहरी स्याह काली बदरी का रंग

ना मालूम कैसे मेरी आँखों से बहकर मेरे चेहरे पे बिखर गया था !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy