Yogeshwar Dayal Mathur
Abstract Inspirational
तराशा था अभिलाषा से
एक विशाल और अचेत पत्थर
प्रतिष्ठान में स्थापित होकर
देगा वरदान सचेत बनकर
निराश हुए मंदिर जाकर
नहीं पहचाना हमें ईश्वर
फिर जीवन भर तराशे थे
अनगिनत पत्थर के माधव
कोई न की आकांशा उनसे।
आधे अधूरे
तोहफ़ा
कल्पना
दीपावली
कुछ लोग
मौसम
परछाईं
मुलम्मा
मुक़द्दर
शिल्पकार
वो भी कह गई मुस्कुराके बेटी है तू बेटी है तू बेटी है तू। वो भी कह गई मुस्कुराके बेटी है तू बेटी है तू बेटी है तू।
पहले खुद से मुलाकात करले अभी के लिए अलविदा तुझे। पहले खुद से मुलाकात करले अभी के लिए अलविदा तुझे।
समझ समझ कर अब कितना समझूं। समझदार भी समझ कर लुट गया भाई। समझ समझ कर अब कितना समझूं। समझदार भी समझ कर लुट गया भाई।
वो बचपन की यादों का कारवां। वो बचपन की यादों का कारवां।
वो मासुमियत वो सच्चाई मुझ में हमेशा रहने देना। वो मासुमियत वो सच्चाई मुझ में हमेशा रहने देना।
बस अकेले ही लड़ रही थी वजूद खुद का ही मिटा रही थी. बस अकेले ही लड़ रही थी वजूद खुद का ही मिटा रही थी.
मना कर रही पड़ी बेबस, रहने दो बेजान पड़ी बूढ़ी माँ यू बिलख रही है, लादे मेरा लाल कोई। मना कर रही पड़ी बेबस, रहने दो बेजान पड़ी बूढ़ी माँ यू बिलख रही है, लादे मेरा लाल...
शुभ्रांशु मेरा नाम है लिखना मेरा काम है. शुभ्रांशु मेरा नाम है लिखना मेरा काम है.
आज गोपाष्टमी है, आज हम गौमाता की पूजा, सेवा करते हैं. आज गोपाष्टमी है, आज हम गौमाता की पूजा, सेवा करते हैं.
फिर ना जाने ये दुनिया क्यों, बेटा और बेटी में इतना फर्क है करती। फिर ना जाने ये दुनिया क्यों, बेटा और बेटी में इतना फर्क है करती।
पर मन और आत्मा के दाग को कहाँ मिटाया जा सकता है ! पर मन और आत्मा के दाग को कहाँ मिटाया जा सकता है !
औघड़दानी भोलेनाथ का रुद्राभिषेक/जलाभिषेक पूजन, अर्चन आरती भला कौन करेगा। औघड़दानी भोलेनाथ का रुद्राभिषेक/जलाभिषेक पूजन, अर्चन आरती भला कौन करे...
शब्दों का भी अपना एक संसार होता है। शब्दों का भी अपना एक संसार होता है।
तब सारे तारे बाराती बनकर जमकर डांस करते हैं । तब सारे तारे बाराती बनकर जमकर डांस करते हैं ।
कौन दिशा कौन डगर मैं चली जा रही। कौन दिशा कौन डगर मैं चली जा रही।
यही है आनंद, जीवन के कुछ पल, यही जीवन के कुछ पल... यही है आनंद, जीवन के कुछ पल, यही जीवन के कुछ पल...
दर्द ही दर्द है जिस में ऐसी है हर पल की ये ज़िंदगी... मेरे जी भर के रोने से भी नहीं= दर्द ही दर्द है जिस में ऐसी है हर पल की ये ज़िंदगी... मेरे जी भर के रोने से भी...
आपको अपना प्यारा सा रामसा पीर रूणिचा में लीनी समाधि, रामसा पीर आपको अपना प्यारा सा रामसा पीर रूणिचा में लीनी समाधि, रामसा पीर
तभी एक मौसी ने अपनाया मां का रूप, नहीं लगने दी, कभी जिंदगी में, दोनों बच्चों को धूप तभी एक मौसी ने अपनाया मां का रूप, नहीं लगने दी, कभी जिंदगी में, दोनों बच...
वह प्रेमी जो था प्रारम्भ से ही तुम्हारा तुम्हारे अंदर का 'स्व'। वह प्रेमी जो था प्रारम्भ से ही तुम्हारा तुम्हारे अंदर का 'स्व'।