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लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

Drama

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लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

Drama

"शिक्षा बनाम व्यवसाय"

"शिक्षा बनाम व्यवसाय"

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प्राचीन काल में शिक्षा ग्रहण का,

उद्देश्य रहा जीवन में संस्कार!

गुरुकुल में रही गुरु शिष्य परंपरा,

मन से बच्चे सीखते शिष्टाचार!!


नैतिकता सत्य अहिंसा करुणा,

शिक्षा का बना रहा आधार!

शनैःशनैः शिक्षा स्तर घट गया,

शिक्षा अब बन गया व्यापार!!


स्कूल बने आमदनी के स्रोत,

शिक्षा का हुआ व्यवसायीकरण!

ख़ूब मुनाफ़ा देख कर अब तो,

स्कूल खोलने में बढ़ा आकर्षण!!


स्कूल खोलना रहा पुनीत कार्य,

माना जाता रहा समाज सेवा!

अब शिक्षा क्षेत्र में बाज़ार दखल,

स्कूल चलाने में दिखता मेवा!!


सामाजिकता से न लेना देना,

पैसे वाले ही खोल रहे स्कूल!

प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना स्टेटस,

कमाई का लाभ यही है मूल!!


भारी भरकम फीस जमा कर,

स्कूल में हो रहा एडमिशन!

कॉपी किताब ड्रेस में भी,

अब ख़ूब चल रहा कमीशन!!


टाई बेल्ट स्कूल का जूता,

अमुक जगह से ही लाना है!

पहले से सेट है यूनिफॉर्म,

बच्चे को कहाँ सिलवाना है!!


सदाचार व संस्कार सीखना,

पहले स्कूलों का रहा रूल!

किस चीज़ में है अधिक कमाई,

बस! अब इस पे जोर देते स्कूल!!



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