शीर्षक- भ्रम.... संदेह
शीर्षक- भ्रम.... संदेह
शीर्षक- भ्रम.... संदेह
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भ्रम ही जीवन का सच है।
जन्म सच तब मृत्यु सच है।
हम तुम संग बस भ्रम हैं।
प्रेम प्यार चाहत भ्रम है।
नीरज भ्रम लिखते हैं।
हम तुम समय होता हैं।
बस सब भ्रम रहते हैं।
हर सुबह जागे भ्रम है।
भ्रम ही संदेह कहता है।
सपने और हमसफर हैं।
कल हमारे मन भ्रम है।
आज ही हम तुम जीते हैं।
कल तो बस एक भ्रम है।
आओ सोचे समझे भ्रम है।
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नीरज कुमार अग्रवाल (लेखक) चंदौसी उत्तर प्रदेश
