शीर्षक - हम और मोक्ष..... सच
शीर्षक - हम और मोक्ष..... सच
शीर्षक - हम और मोक्ष...... सच
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जिंदगी में शौक सब करते हैं।
हर एक के शौक अलग होते हैं।
बस हम सब स्वार्थ ही रखते हैं।
हम सब सुख दुख भी समझते हैं।
समय उम्र और सोच रह जाती हैं।
नीरज कविता से जागरूक करते हैं।
शब्दों में हम और मोक्ष सच रहते हैं।
संपत्ति धन अर्पण हम कर जाते हैं।
रिश्ते नाते संतान सब भूल जाते हैं।
वो राह संसारिक मोह-माया बसे हैं।
मोक्ष और सत्य हमें सब समझते है।
हां युग कोई सत्य धर्म कर्म रहते हैं।
आओ हम कलयुग में हरि जपते हैं।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
