शीर्षक - प्रेम प्यार चाहत
शीर्षक - प्रेम प्यार चाहत
शीर्षक -प्रेम प्यार चाहत
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प्रेम प्यार चाहत हम जानते हैं।
जीवन और जिंदगी मानते हैं।
जिंदगी और हम समझते हैं।
तेरे मेरे सपने और हमसफर हैं।
शब्दों के साथ हम तुम होते हैं।
न हम तुम और सोच रखते हैं।
एहसास और एतबार होते हैं।
प्रेम प्यार चाहत सच कहते हैं।
दिल की धड़कन बन जातीं हैं।
मन भाव और हमें तुम्हें प्रेम है।
प्यार में हम सब मिलन करते हैं।
बस यही तो आज की राह होती है।
चाहत और हम तुम हमसफर बने हैं।
शब्दों के साथ हम तुम राह निभाते हैं।
हर पल लम्हा हम सब मिलकर जीते हैं।
सच और हकीकत शब्दों में ही रहते हैं।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश

