शीर्षक - ऊपर नीचे ..... लाभ हानि
शीर्षक - ऊपर नीचे ..... लाभ हानि
शीर्षक - ऊपर नीचे .... लाभ हानि
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हम जीवन में ऊपर नीचे होते हैं।
लाभ हानि भी हम समझते हैं।
मेले में लगा गोल झूला कहता हैं।
ऊपर नीचे जीवन चक्र चलता है।
नीरज शब्दों में ऊपर नीचे लिखते हैं।
सोच सबकी अपनी अपनी रहतीं हैं।
कुदरत के रंगमंच पर किरदार निभाते हैं।
ऊपर नीचे हम सबका भाग्य रहता हैं।
न पता ऊपर नीचे लाभ हानि होता हैं।
बस यही जिंदगी में हमारा सच रहता हैं।
ऊपर नीचे के साथ समझौता करते हैं।
मुस्कुरा कर हम सभी जिंदगी जीते हैं।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
