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Neeraj Kumar Agarwal

Fantasy Inspirational Others

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Neeraj Kumar Agarwal

Fantasy Inspirational Others

शीर्षक - विडंबना .... हम

शीर्षक - विडंबना .... हम

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शीर्षक - विडंबना...... हम

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हम सभी के साथ कैसी विडंबना है।

जीवन में सहयोग न हम करते हैं।

हां हम सभी बस दिखावा करते हैं।

इंसान बस इंसान से स्वार्थ रखते हैं।

हम न भावनाओं को समझ पाते हैं।

मृत्यु पर दसवां तेरहवीं निभाते हैं।

सच जिंदगी में यह कैसी विडंबना है।

माता पिता के साथ हम जवां होते हैं।

नीरज शब्दों में एक विडंबना लिखते हैं।

बुढ़ापे में बोझ वो‌ बने विडंबना कैसी हैं।

धर्म कर्म हम सभी अपने समझते हैं।

आत्मा के साथ हम विडंबना रखते हैं।

न साथ कुछ लाए हम न ले जाना हैं।

बस हमारी लोभ मोह माया रहतीं हैं।

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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश 


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