STORYMIRROR

Siddhi Diwakar Bajpai

Classics

4  

Siddhi Diwakar Bajpai

Classics

शायद

शायद

1 min
301

कही खोया हुआ है वो पल शायद

वक्त गया है पूरा बदल शायद

न कर पाऊँगी अब मैं पहल शायद

कोई अकेला हुआ आजकल शायद


बीज बोये थे मैंने बबूल के जब

 फिर उम्मीद क्यों, निकलेंगे फल शायद

हर चीज़ का ईलाज है दुनिया में

पर नशे का है ना कोई हल शायद


अंजाम से इत्तेफाक तो बेशक है

पर होता न उनसे अमल शायद

मेरी राख को जब भी कुरोदोगे तुम

याद आएँगे गुज़रे वो पल शायद।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics