STORYMIRROR

डॉ दिलीप बच्चानी

Tragedy

4  

डॉ दिलीप बच्चानी

Tragedy

शाहीनबाग आंदोलन।

शाहीनबाग आंदोलन।

1 min
546

आंदोलन की आड़ में छुप,

लगे जिहाद के नारे हैं

हमको ये मंजूर नहीं है,

ये फ़साद के नारे हैं। 


देश विरुद्ध जो बोल रहे हो

कुछ तो थोड़ा शर्म करो,

या फिर चुल्लू भर पानी में

जाओ जाकर डूब मरो। 


सारे मिलकर लड़े चुनाव थे

पर जनता ने दुत्कार दिया,

फिर से अपना रूप बदलकर

मिल गए अब ये सारे है। 


हम राम के वंशज है ठहरे

हमे हिंसा में विश्वास नहीं,

पर इतना तो तुम भी जानो

हम निस्सहाय निःश्वास नहीं। 


हिंद भूमि यह पुण्य वसुंधरा

हम सबकी यह माता है,

हम सबको है प्यारी ये माँ

हम भी इसके प्यारे हैं। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy