सबकी मां।
सबकी मां।
एक मां तो वो,
जिसके गर्भ में रहे,
फिर पैदा हुए,
जिसने बचपन में,
मार्गदर्शन किया,
और हमें वर्तमान दिखाया।
दूसरी मां प्रकृति,
जो हम सबकी,
हर इच्छा,
पुरी करती।
जब भी हमें,
कुछ चाहिए,
बिना कुछ लिए,
झट से दे देती,
कभी संकोच नहीं करती।
शायद उस पर,
हमारी निर्भरता,
बहुत अधिक,
वरना हम,
जिंदगी में,
कभी कुछ न कर पाते,
जिंदगी में,
असफल हो जाते।
लेकिन हम हैं,
बहुत स्वार्थी औलाद,
जिसने हमें,
इतना कुछ दिया,
जिंदगी को सहज बनाया,
उसे ही हमने,
आघात पहुंचाया।
हम पेड़ों को,
अंधाधुंध काट देते,
अवैज्ञानिक ढंग से,
सड़कें और इमारतें,
बना डालते,
नदीयों का रास्ता,
बदल डालते,
उनमें अपनी,
गंदगी डाल देते,
फिर उसको,
साफ तक नहीं करते।
इन सब में,
हम इस हद तक बढ़ जाते,
मां प्रकृति को,
बीमार कर डालते,
उसका उपचार तक नहीं करते।
अगर करते,
तो आधे मन से करते,
जिससे वो ठीक,
होने के बजाय,
और बीमार पड़ जाती।
आज हालत,
यहां तक आ गई,
हमारी प्रकृति मां,
आईसीयू में चली गई,
सब डाक्टर,
बार बार कह रहें,
अगर कुछ,
आपातकालीन नहीं किया,
तो फिर,
प्रकृति मां का,
जीवन खतरे में,
इसके साथ,
हम सबका भी।
तो चलो साथियों,
आगे बढ़ते,
हर सरकार के लिए,
एक प्रकृति मां का,
एजेंडा देते,
अगर तो वो,
उसका अनुसरण करती,
तो तो ठीक,
वरना किसी ओर को वोट।
