सावन बरसता है
सावन बरसता है
जब से सावन बरसता है,
तो दिल मेरा मचलता है।
बूँदें गिरती हैं जब तन पर,
हर बूँद से बदन मेरा ज़लता है।
भीगी भीगी हवाओं के संग,
यादों की बीजली चमकती है।
देखकर बादलों की बारात,
दर्द-ए-दिल भी बहलता है।
लटक मटक तेरी अदा देखकर,
मन मेरा दीवाना बनता है।
हर अदा तेरी लगे मुझे प्यारी,
शराबी शबनम तू लगती है।
तेरे मिलन की गहरी तड़प से,
मन मेरा तुझको तरसता है।
आ कर दे दे आलिंगन "मुरली",
आज मौसम मस्त बहारों का है।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

