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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

सावन बरसता है

सावन बरसता है

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जब से सावन बरसता है,
तो दिल मेरा मचलता है। ​

बूँदें गिरती हैं जब तन पर,
हर बूँद से बदन मेरा ज़लता है। ​

भीगी भीगी हवाओं के संग,
यादों की बीजली चमकती है। ​

देखकर बादलों की बारात,
दर्द-ए-दिल भी बहलता है।

लटक मटक तेरी अदा देखकर,
मन मेरा दीवाना बनता है। ​

हर अदा तेरी लगे मुझे प्यारी,
शराबी शबनम तू लगती है।

तेरे ​मिलन की गहरी तड़प से,
मन मेरा तुझको तरसता है।

आ कर दे दे आलिंगन "मुरली",
आज मौसम मस्त बहारों का है।

 रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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