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Pratibha Bilgi

Romance

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Pratibha Bilgi

Romance

साथ

साथ

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आँखों में छुपाकर रखा है

नजरों में चुराए रखा है 

ए यार, तुम्हें तो हमने 

अपने दिल में बसा के रखा है ।


 तू ही वह एक है 

 जिसे हमने चाहा बेशुमार

 कैसा नशा छाया है, तुम्हारा 

 हम पर, कैसा है यह खुमार ?

 

जितना भूलना चाहूं 

उतने ही याद आते हो 

हंसते - हंसते आंखों में मेरी 

चुपके से आँसू दे जाते हो । 


मेरी आंखों की नामी देखकर 

सभी इसका कारण पूछते हैं 

कैसे बताऊं उन सबको की 

यह तो अंजाम ए मोहब्बत है !


डरती हूँ सोचकर जानेजाना

क्या अंजाम मेरे प्यार का होगा 

तुमने अगर साथ निभाया 

तो हर मुश्किल का करूंगी मैं सामना ।


मुश्किलों से नहीं मैं घबराती 

ना ही फिक्र है अंजाम का 

मैं तो डरती हूं जुदाई से 

जो जीने ना दे मुझे एक पल चैन का !


मैं तो दिल से चाहती हूँ 

तू साथ रहे मेरे हमेशा 

दिल में थोड़ी सी जगह रखना 

जिसमें रहूँ मैं चुपके से सजना ।


कभी ना मुझको भुला देना 

देखो तुम्हें मेरे सच्चे प्यार का वास्ता 

तूने अभी तक नहीं जाना 

मैं देखूं हमेशा तुम्हारा ही रास्ता !


ऐसा लगे जनम - जनम का 

साथ है मेरा - तुम्हारा 

ना भूलूँ मैं, ना भूलो तुम 

मोहब्बत से भरा आशियाना !!!



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