साथ
साथ
आँखों में छुपाकर रखा है
नजरों में चुराए रखा है
ए यार, तुम्हें तो हमने
अपने दिल में बसा के रखा है ।
तू ही वह एक है
जिसे हमने चाहा बेशुमार
कैसा नशा छाया है, तुम्हारा
हम पर, कैसा है यह खुमार ?
जितना भूलना चाहूं
उतने ही याद आते हो
हंसते - हंसते आंखों में मेरी
चुपके से आँसू दे जाते हो ।
मेरी आंखों की नामी देखकर
सभी इसका कारण पूछते हैं
कैसे बताऊं उन सबको की
यह तो अंजाम ए मोहब्बत है !
डरती हूँ सोचकर जानेजाना
क्या अंजाम मेरे प्यार का होगा
तुमने अगर साथ निभाया
तो हर मुश्किल का करूंगी मैं सामना ।
मुश्किलों से नहीं मैं घबराती
ना ही फिक्र है अंजाम का
मैं तो डरती हूं जुदाई से
जो जीने ना दे मुझे एक पल चैन का !
मैं तो दिल से चाहती हूँ
तू साथ रहे मेरे हमेशा
दिल में थोड़ी सी जगह रखना
जिसमें रहूँ मैं चुपके से सजना ।
कभी ना मुझको भुला देना
देखो तुम्हें मेरे सच्चे प्यार का वास्ता
तूने अभी तक नहीं जाना
मैं देखूं हमेशा तुम्हारा ही रास्ता !
ऐसा लगे जनम - जनम का
साथ है मेरा - तुम्हारा
ना भूलूँ मैं, ना भूलो तुम
मोहब्बत से भरा आशियाना !!!

