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Dinesh Dubey

Romance

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Dinesh Dubey

Romance

साथ चले थे

साथ चले थे

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वो बेवफा कभी ना थी,

पर वफा भी ना कर सकी,

सपने जो देखे थे साथ हमने,

उस पर वो अमल न कर सकी।


कोई शिकवा न शिकायत है,

ये तो अपनी अपनी रवायत है,

कुछ कदम हम साथ चले थे उसके,

कुछ कदम पर वह साथ छोड़ गई।


इसमें उसकी कोई फितरत न थी,

उसे तो इस बात का इल्म ही न था,

वह खुद के लिए थी पीछे हटी,

या मुझको बचाने के लिए हटी।


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