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Divyanshi Triguna

Abstract Romance Fantasy

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Divyanshi Triguna

Abstract Romance Fantasy

सांवरिया का स्वप्न

सांवरिया का स्वप्न

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आईं मैं सज के और सवर के, 

अपने मोहन से मुलाकात को,

इन निगाहों में बरसात होती हैं, 

जब मेरे दिल में तेरी बात होती हैं,


तुझसे से मिलने को, आईं मैं मोहन

अब तो ऐसी मुलाकात हो,

तेरी नज़रों में इंतज़ार मेरा हैं,

मेरे दिल में वो प्यार तेरा हैं,


देख लूं जी भरके, सांवरिया को अपने

सबकुछ हैं वहीं, वो प्यार मेरा हैं

जब से देखा हैं, मोहन को अपने

मैं तो उसकी, बस उसकी हो चलीं


बरसों की चाहत, आज पूरी हैं

बरसों की राहत, आज मिलीं हैं कहीं

मुस्कुराता चेहरा, मोहन का मेरे

उनसे एसी मुलाकात हुई,


उस सूरत को अपने, दिल में संजोए

उठीं नींद से, आज पलकें भिगोएं

ख्वाब जो टूटा, मेरा दिल भी टूट गया 

काश आज तो ये, ख्वाब भी सच होता.......


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