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Akanksha Gupta

Abstract


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Akanksha Gupta

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साइकिल मेरी दोस्त

साइकिल मेरी दोस्त

1 min 19 1 min 19

मेरी साइकिल पर चलता रहता है आज भी

बचपन की यादों का कारवां अनोखा सा,

मीलों तक जाना जाकर वापस लौट आना

रास्तों में यारों संग सपनों के मोती पिरोना,

पीछे मुड़कर रुक जाना और करना यारों का इंतजार

पीछे बैठकर दुनियाभर की होशियारी सिखाते थे दो चार,

कभी जो होती तनातनी यारो संग बाजार में

पिचके हुए पहिये की साइकिल पैदल चलती तकरार में,

जाने कितने लम्हे ऐसे ही जिये है साइकिल के इन पहियों पर

बचपन का यह साथी अब छूटा समय की तेज रफ्तार पकड़।


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