रूहानियत
रूहानियत
चल थोड़ी रूहानियत कर लेते हैं
एक दूजे को बांहों में भर लेते हैं
सांसों को मिलने दे सांसों से
आओ ना थोड़ी आंखों से बातें कर लेते हैं
खुले बदन का वो आपस में लिपटना
चलो आज लिपटने का अहसास कर लेते हैं
बहक ना जायें कहीं पहले प्रण कर लेते हैं
बहुत सहा दर्द तुम ने एक एक सांस
जीने को, चल उन सांसों को चुरा लेते हैं
तड़प वह जिंदगी की,
चल आज हर तड़प एक दूजे के हो कर भुलाते हैं
चल थोड़ी रूहानियत कर लेते हैं ।।

