STORYMIRROR

रुहानी यादें

रुहानी यादें

1 min
478


करवटों से तेरी

सिलवटें पड़ी जो चदर पर

निहारती हूँ उसे

यादों में तेरी

तेरे जाने के बाद।


खुशबू से तुम्हारे

महक रहा है

हर वो कमरा

जहाँ चार कदम

तुम चले थे।


रुहानी यादें

जिस्म के पार हो

आँखें चमका जाती है

जब तेरे होठों की हँसी

याद आती है।


समझ लेना पगली

या समझ लेना नादान

सोच चाहे रख्खो कुछ भी

सच तो ये है

हमारा हर फैसला तुमको सौंपा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance