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Asmita prashant Pushpanjali

Classics


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Asmita prashant Pushpanjali

Classics


माफ हो जाये।

माफ हो जाये।

1 min 250 1 min 250

समंदर की लहरें

और दिल की धड़कन

ना जाने कब,

तेज हो जाये।


इश्क करने का गुनाह

गर हो जाये हमसे,

तो ऐ जमाने

माफ हो जाये।


समुंदर की गहराई 

भला माप सका है कोइ,

तो हम भला

दिल की करवट

कैसे जान जाये

आये जो वो 

मेहमाँ बन कर,

कैसे इनकार कर पाये।


रूतं चले जब,

बहार खिले जब,

मौसम बदले जब,

हम कैसे अनछुये रहे

इस हलचल से, और

इश्क करने का गुनाह

गर हो जाये हमसे,

तो ऐ जमाने

माफ हो जाये।


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