STORYMIRROR

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता "

Classics

4  

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता "

Classics

ताल मिला

ताल मिला

1 min
499

ताल मिला आईना जो देखा दिले-हाल मिला 

है मधुर संगीत ताल से ताल मिला 


था बेतरतीब हर कोई इस शहर में, 

देखा गौर से, न कोई फटेहाल मिला


जवाब ढूंढ़ने चला और उलझ गया

जो भी मिला, मुख पर सवाल मिला

एहसासों का समंदर बहुत गहरा था, 

उम्मीदी ना सीप ही, न शैवाल मिला


माना क़ि तूफां में घिरना था लाज़मी, 

पर हौसले की नाव पे बड़ा पाल मिला


संवेदना में सुलगता अंदर उबाल मिला

"उड़ता"आते वक़्त में आगे काल मिला।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics