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सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता "

Abstract


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सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता "

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राम नाम बड़ा है

राम नाम बड़ा है

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राम का नाम बड़ा है

प्यारा सा संदेशा हुआ है

राम-मंदिर का अंदेशा हुआ है

सनातनी सब उठ खडे हैं

कार्यों पे जैसे टूट पड़े हैं

अंधकार सब दूर हुआ है

ज्ञान-प्रकाश फ़ैल गया है

जैसे पेड़ से फल झड़ा है

राम का नाम बड़ा है।


देखो कितना इंतज़ार किया है

कायनात ने ये मौका दिया है

हर कण - कण में राम बसे हैं

आज सभी देवी - देवता हँसे है

जैसे फूल-क्यारी लहलहाती है

सृष्टि फूली नहीं समाती है

रामभक्ति का खुमार चढ़ा है

राम का नाम बड़ा है। 


ढ़ोल - नगाड़े बज रहे हैं

हर घर दिये जल रहे हैं

दिवाली का सा उत्सव है

अबतक नैना अविरल रहे हैं

शंख से उद्धघोष हुआ है

हर हिन्दू में जोश हुआ है

भक्ति रस से भरा घड़ा है

राम का नाम बड़ा है।


आज अयोध्या, मथुरा,काशी

दीपों की हो गयी नक्काशी

आ गयी रामलला की बारी

करते पूजन नर और नारी

नए युग का आगाज़ हुआ है

दिल में हर्ष अपार हुआ है

मुकुट राम के स्वर्ण जड़ा है

राम का नाम बड़ा है। 


कोई हनुमान सा रामभक्त नहीं

अब कुछ भी विरक्त नहीं

राम से ही हर कृपा बनी है

कोई रामभक्त आसक्त नहीं

श्रद्धा और विश्वास है

सबकी कोई तो प्यास है

सरयू का पानी आगे बढ़ा है

राम का नाम बड़ा है।


कोई भी स्तुति अल्प नहीं

आस्था का कोई विकल्प नहीं

इतिहास नहीं बनता एक दिन में

ये संभव बिना संकल्प नहीं

कोई सवाल आज नहीं

रुके कभी कोई काज नहीं

"उड़ता"तेरा भी मस्तक झुका है!


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