Writer , poet
खेतों में खलियानों में, बनकर पंछी चहचहाना चाहती हूं। खेतों में खलियानों में, बनकर पंछी चहचहाना चाहती हूं।
कभी आती नहीं पतझड़,बहारों में बिना मोसम। कभी आती नहीं पतझड़,बहारों में बिना मोसम।
और तुफाँ है कि, रुकने का नाम ही नहीं लेता। और तुफाँ है कि, रुकने का नाम ही नहीं लेता।
वो बोले, "हाँ, तुम्हें अपनी बनाऊंगा जरूर।" वो बोले, "हाँ, तुम्हें अपनी बनाऊंगा जरूर।"
माझ्यातील स्त्री एक प्रेरणा बनून जिवंत रहावी म्हणून। माझ्यातील स्त्री एक प्रेरणा बनून जिवंत रहावी म्हणून।
जलाई ना जाये नारी जहाँ आओ एक देश बसाये जलाई ना जाये नारी जहाँ आओ एक देश बसाये
जनता का ये तोड़े विश्वास फिर भी कहे, हम सेवक है खास। जनता का ये तोड़े विश्वास फिर भी कहे, हम सेवक है खास।
जिसे मोल नहीं कला की जिसके खून में रंग नहीं कला का। जिसे मोल नहीं कला की जिसके खून में रंग नहीं कला का।
जब थक जाते है, हार जाते है, अपने और अपनों से लड़ते लड़ते तब भीतर से महसूस करना चाहते जब थक जाते है, हार जाते है, अपने और अपनों से लड़ते लड़ते तब भीतर से महसूस ...
इतने सालों में उन्हें पैसे और इंसान की अहमियत समझ में आ चुकी थी। इतने सालों में उन्हें पैसे और इंसान की अहमियत समझ में आ चुकी थी।