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vartika agrawal

Inspirational

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vartika agrawal

Inspirational

रे मन

रे मन

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गीत


रे मन! तुम भी तो अर्जुन हो, एक बार तो हारे हो ।

युद्ध-क्षेत्र में तो अपनों पर, मन की दौलत वारे हो ।।


देख धूर्तता भी छोड़े सब, दंड नहीं तुम देते हो ।

भ्रष्टाचारी रिश्तों से भी, नेह-भाव ही सेते हो ।।

प्रीत सदा ही क्यों खोजे मन, क्यों सोचे तुम प्यारे हो ।

युद्ध-क्षेत्र में तो अपनों पर,मन की दौलत वारे हो ।।


दंडित करने से सिसके मन, पाप आत्मा झेले है ।

पापी तो बस नादां उर से, बार-बार ही खेले है।।

बन जा पाहन-सा अब उर से, मौन- शब्द जब धारे हो।

युद्ध-क्षेत्र में तो अपनों पर, मन की दौलत वारे हो ।।


उन कर्तव्यों से मत भागो, कर्म राह जो आते हैं ।

पहन मुखौटे संबंधी के, ये अपने भरमाते हैं।।

कर्म-योग पथ ही अपनाओ, क्या तुम खड़े विचारे हो ।

युद्ध-क्षेत्र में तो अपनों पर, मन की दौलत वारे हो।।



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