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JAYANTA TOPADAR

Tragedy

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JAYANTA TOPADAR

Tragedy

क़शमकश भरी ज़िंदगी...

क़शमकश भरी ज़िंदगी...

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आज के त्वरित अत्याधुनिकता के 

मायाजाल में मोहांध

'तथाकथित' उन्नत मानव निस्संदेह   

अपना सही राह भूल चुका है।

 इस तकनीकी युग में अत्याधुनिक मानव     

घड़ी की सुईयों-सा निरंतर 

प्रतियोगिता करने पे अमादा हो चुका है।  

अत्याधुनिक मानव की दयनीयता का एहसास

हम इस बात पर लगा सकते हैं कि उसे

स्वजन-कुटंब से पारिवारिक संपर्क 

स्थापित करने के लिए रुबरु नहीं, 

महज़ दिखावे के लिए, असहाय होकर

दूरभाष-यंत्र का सहारा लेना पड़ता है।


आज के इस अत्याधुनिक युग में इंसान 

इस कदर अपनी एक अलग दुनिया 

बसा लेते हैं कि उन्हें (दूसरों की छोड़िए), 

अपनों का हालचाल पूछने के लिए भी

वक्त निकालना नामुमकिन-सा लगता है !


क्या ये सही परिवर्तन है...?

आज इंसान किस पथ पर निकल पड़ा है...?? 

गौर फरमाने वाली बात है।


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